सीआईडी
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सीआईडी १९वें वर्ष के दौरान
शैली अपराध कथा, लड़ाई, नाटक, हास्य, डरावना, प्रेम
प्रारूप प्रक्रियात्मक पुलिस
सर्जक बृजेन्द्र पाल सिंह
लेखक बृजेन्द्र पाल सिंह, श्रीराम राघवन, श्रीधर राघवन, रजत अरोड़ा,
निर्देशक बृजेन्द्र पाल सिंह, राजन वाघधरे, सीबा मिश्रा, संतोष शेट्टी, सलिल सिंह, नितिन चौधरी
सितारे नीचे देखें
निर्माण का देश भारत
भाषा(एं) हिन्दी
सत्र संख्या
प्रकरणों की संख्या २६ अप्रैल २०१५ को १,२२१ हुआ।
निर्माण
कार्यकारी निर्माता
  • सतीश दुबे
  • शाश्वन्त जैन
  • राजेन्द्र पाटिल
  • विकास कुमार
निर्माता बृजेन्द्र पाल सिंह, प्रदीप उपूर
संपादक केदार गोतागे, भक्ति मायालों, शचिन्द्र वत्स
छायांकन बृजेन्द्र पाल सिंह, राकेश सारंग
प्रसारण अवधि ४२ - ४४ मिनट
निर्माण कंपनी फायरवर्क्स
प्रसारण
मूल चैनल सोनी
मूल प्रसारण २१ जनवरी १९९८ – वर्तमान
कालक्रम
संबंधित कार्यक्रम सीआईडी: स्पेशल ब्यूरो
बाह्य सूत्र
आधिकारिक जालस्थल

सीआईडी सोनी चैनल पर प्रसारित होने वाला हिन्दी भाषा का एक धारावाहिक है, जिसे भारत का सबसे लंबा चलने वाला धारावाहिक होने का श्रेय प्राप्त है। अपराध व जासूसी शैली पर आधारित इस धारावाहिक में शिवाजी साटम, दयानन्द शेट्टी और आदित्य श्रीवास्तव मुख्य किरदार निभा रहे हैं। इसके सर्जक, निर्देशक और लेखक बृजेन्द्र पाल सिंह हैं। इसका निर्माण फायरवर्क्स नामक कंपनी ने किया है जिसके संस्थापक बृजेन्द्र पाल सिंह और प्रदीप उपूर हैं।

२१ जनवरी १९९८ से शुरु होकर यह धारावाहिक अब तक लगातार चल रहा है। इसका प्रसारण प्रत्येक शनिवार और रविवार को रात १० बजे होता है। इसका पुनः प्रसारण सोनी पल चैनल पर रात ९ बजे होता है जिसमें इसके पुराने प्रकरण दिखाये जाते हैं। इस धारावाहिक ने २१ जनवरी २०१८ को अपने प्रसारण के २० वर्ष पूर्ण किये और २१वें वर्ष में प्रवेश किया। इससे पहले, २७ सितम्बर २०१३ को इस धारावाहिक ने अपनी १०००वीं कड़ी पूरी की। इस धारावाहिक को कई अन्य भाषाओं में भी भाषांतरित किया गया है।

कहानी

इस धारावाहिक की जासूसी कहानियाँ मुंबई अपराध अनुसंधान विभाग द्वारा आपराधिक मामलों की गुत्थी सुलझाने से संबंधित हैं। इसका संचालन एसीपी प्रद्युम्न (शिवाजी साटम) करते हैं, जो अपने दायित्व के कारण अपने अपराधी बेटे नकुल (राहील आज़म) को गोली मार देते हैं। वरिष्ठ निरीक्षक विरेन (आशुतोष गोवरिकर) के बच्चे को खेलते समय एक व्यक्ति सामने आने वाली गाड़ी से बचा लेता है जिसमें बच्चे को तो कुछ नहीं होता है, लेकिन उस व्यक्ति को चोट लग जाती है। विरेन उसे अपने घर लाकर उसे दवाई लगाते हुए उसका धन्यवाद करता है। बाद में विरेन को पता चलता है कि जिस व्यक्ति ने उसके बेटे की जान बचाई थी, वह एक अपराधी है। जैसे ही उस व्यक्ति को पता चल जाता है कि उसका राज खुल गया है, वैसे ही वह व्यक्ति विरेन के परिवार को अपने कब्जे में ले लेता है। वह विरेन से कहता है कि यदि वह सही सलामत किसी दूसरे शहर में उसे नहीं ले जा पाया तो वह उसके परिवार को मार देगा। विरेन मजबूरी में उसकी बात मान लेता है। हालांकि बाद में उसे ऐसा करना सही नहीं लगता और वह सारी बात सीआईडी को बता देता है। उस अपराधी की सहायता करने के कारण वह अपने आप को दोषी मानने लगता है और सीआईडी से बाहर जाने की सोचता है। हालांकि एसीपी प्रद्युम्न उसे ऐसा करने से रोक देता है और कहीं दूसरे स्थान पर उसका तबादला कर देता है।

इसके कुछ दिनों बाद एक मामले का अन्वेषण करते समय सीआईडी को गाड़ी से एक व्यक्ति मिलता है। उसके पहचान पत्र से पता चलता है कि वह पुलिस में काम करता है व उसका नाम अभिजीत (आदित्य श्रीवास्तव) है लेकिन उस व्यक्ति को अपना नाम भी याद नहीं रहता है। वह सीआईडी की कई तरह से मदद करता है जिसके कारण एसीपी प्रद्युम्न उसे सीआईडी से जुड़ने के लिए कहता है। अभिजीत पहले जुड़ने से मना कर देता है लेकिन बाद में मान जाता है। इसी के बाद अभिजीत और दया (दयानन्द शेट्टी) की दोस्ती हो जाती है।

निर्माण

सीआईडी श्रृंखला के निर्माता बृजेन्द्र पाल सिंह हैं, जिन्होंने वर्ष १९७३ में दूरदर्शन पर समाचारों के लिए कैमरामैन के रूप में लगभग दस वर्षों तक कार्य किया। इसी दौरान उनके मन में एक जासूसी धारावाहिक बनाने का विचार आया।[1] उस समय इस प्रकार के जासूसी के धारावाहिक नहीं बनते थे और उनके पास इस प्रकार के धारावाहिक बनाने का कोई ज्ञान भी नहीं था। उन्होंने दूरदर्शन से इस बारे में बात की और साथ-साथ वे अपने नए धारावाहिक की तैयारी में भी लगे रहे। इसी दौरान वे पुलिस की अपराध शाखा का दौरा करने के लिए भी गए। वहाँ उन्होंने कुछ पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत की और उनके द्वारा हल किए गए मामलों और उनकी जासूसी की शैली के विषय में भी अच्छे से जाना।[1] श्रीकांत सिंकर द्वारा लिखित एक जासूसी उपन्यास से भी उन्होंने प्रेरणा ली। इसी दौरान उन्होंने एक रहस्यपूर्ण हत्या पर आधारित "सिर्फ चार दिन" नामक एक फिल्म भी बनाई जिसका प्रसारण दूरदर्शन पर हुआ। दूरदर्शन के लिए ही उन्होंने एक शून्य शून्य नामक एक धारावाहिक भी बनाया जो किसी समय में तीसरा सर्वाधिक प्रसिद्ध कार्यक्रम रहा।[1] मराठी भाषा में भी उन्होंने कई कार्यक्रम बनाए। फिर उन्होंने एक और जासूसी धारावाहिक शृंखला बनाने का कार्य शुरू कर दिया, जो बाद में सी आई डी के रूप में सामने आया।[1] सोनी चैनल १९९४ में प्रारम्भ हुआ जबकि आठ वर्ष पूर्व १९८६ में ही सिंह ने सी आई डी के छह एपिसोड बना लिए थे। फिर जब भारत में सैटेलाइट टेलिविज़न का आगमन हुआ तो सिंह ने इस धारावाहिक के लिए कई चैनलों से बात की, परंतु सोनी ने इस धारावाहिक में अधिक रुचि दिखाई और इसके प्रसारण के लिए सहमति दे दी। इसके बाद सिंह को केवल इस धारावाहिक को बनाने के लिए इसके पात्र और इसके बनाने का स्थान चुनना था।[1][2]

उन्होंने सबसे पहले हिन्दी और मराठी फिल्म अभिनेता शिवाजी साटम को एसीपी प्रद्युम्न के किरदार के लिए चुना[3] जो कि पहले ही कई परियोजनाओं में उनके साथ कार्य कर चुके थे। सीआईडी के निर्माण दल के एक सदस्य संजय शेट्टी ने दयानन्द शेट्टी को पात्रों के चुनाव में हिस्सा लेने का सुझाव दिया था। सिंह उनसे इतने प्रभावित हुए कि पाँच मिनट में ही उन्हें दया के किरदार के लिए चुन लिया। उनका किरदार लोगों के बीच सबसे लोकप्रिय है। आशुतोष गोवरिकर को वरिष्ठ निरीक्षक विरेन की भूमिका के लिए चुना गया किन्तु अपनी फिल्म लगान के निर्देशन के कारण उन्हें इस धारावाहिक को छोड़ना पड़ा।[4] आदित्य श्रीवास्तव को १९९८ में अपराधी का किरदार मिला था, किन्तु अब उन्हें वरिष्ठ निरीक्षक अभिजीत का किरदार दे दिया गया। आदित्य ने राम गोपाल वर्मा की फिल्म सत्या में भी अभिनय किया था जिससे सिंह काफी प्रभावित थे। प्रारम्भ में वे केवल २६ एपिसोड हेतु सीआईडी में काम करने के लिए सहमत हुए थे लेकिन बाद में आगे भी कार्य करने के लिए मान गए।[3] वे २३ जुलाई १९९९ को पहली बार वरिष्ठ निरीक्षक अभिजीत की भूमिका में दिखाई दिये थे। अन्य सभी किरदारों को भी इसी तरह से चुना गया था। शिवाजी साटम, दयानन्द शेट्टी और आदित्य श्रीवास्तव के अलावा अन्य सभी किरदार आते जाते रहते हैं।[2][3]

इस धारावाहिक के पन्द्रह वर्ष पूरे होने के बाद फ़ोर्ब्स पत्रिका के साथ हुए साक्षात्कार में सिंह ने बताया कि प्रारम्भ में हर एपिसोड पर लगभग २ लाख रुपये खर्च आता था, जो कि पन्द्रह वर्ष के दौरान बढ़कर ₹५ लाख हो गया है।[4]

स्थान

इस धारावाहिक का निर्माण का कार्य मुम्बई में शुरू हुआ और मुख्यतः यहीं निर्मित किया जाता है। इसके अनेक भाग भारत के कई अन्य स्थानों में भी बनाए गए हैं। इन स्थानों में दिल्ली, जयपुर, कोलकाता, मनाली, चेन्नई, शिमला, जोधपुर, जैसलमेर, गोवा, पुणे, औरंगाबाद, कोल्हापुर, हिमाचल प्रदेश, केरल और कोच्चि आदि सम्मिलित है।[5][6] दिल्ली के सदर बाजार और जामा मस्जिद में भी इसे बनाने की योजना थी।[7] लेकिन बहुत भीड़ के कारण यह संभव नहीं हो पाया। इसे संगम विहार, दिल्ली हाट और लाजपत नगर इलाके में बनाया गया। इसके बाद आगरा और मथुरा में भी अगले एपिसोड की शूटिंग हुई, जिसका प्रसारण २४ से २६ जुलाई को "मर मिटेंगे" नाम से हुआ।[8] इसके अलावा कुछ भागों का निर्माण विदेशों में भी हुआ है। सीआईडी की आखिरी चुनौती नामक एक छोटी शृंखला को लंदन में भी बनाया गया था जिसमें महेश मांजरेकर ने हरगिज़ डोंगारा नामक अपराधी की भूमिका निभाई। २००४ में ‘सीआईडी’ के तीन प्रकरणों का निर्माण इंग्लैंड में हुआ और २०१० में ८ प्रकरणों का निर्माण स्विटजरलैंड और पेरिस में हुआ था।[9]

प्रसारण

२१ जनवरी १९९८ को रात ९:३० बजे इसका प्रसारण सोनी चैनल पर शुरू हुआ। इस धारावाहिक के २६ प्रकरण होने के पश्चात आदित्य श्रीवास्तव को वरिष्ठ निरीक्षक अभिजीत की भूमिका में दिखाया गया। इसके पश्चात यह अब तक चल रहा है। इसका प्रसारण शुरू में बुधवार को रात ९:३० बजे होता था जिसे बाद में बदलकर शुक्रवार को रात १० बजे कर दिया गया।[10] २१ मई २०१० से इसका प्रसारण शुक्रवार के साथ साथ शनिवार को भी होने लगा।[11] ३ फरवरी २०१३ से इसका प्रसारण शुक्रवार और शनिवार के साथ साथ रविवार को भी होने लगा।[12] मई २०१६ में द कपिल शर्मा शो के कारण इसका प्रसारण कुछ सप्ताह नहीं हुआ। इसके निर्माताओं ने कहा कि द कपिल शर्मा शो नया होने के कारण उसे और लोगों तक पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया था और यह भी कहा कि सीआईडी का जल्द ही नए समय पर प्रसारण होगा।[13] ४ जून २०१६ से इसका प्रसारण फिर से शुरू हो गया और इसका समय १० बजे से बदल कर १०:३० हो गया।[14]

इसकी लोकप्रियता को देखते हुए इसे अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवादित किया गया है। इसका तेलुगू संस्करण मां टीवी में और तमिल संस्करण ज़ी तमिल में प्रसारित हो रहा है। इसके अलावा बंगाली में इसकी भिन्न शृंखला निकाली गई है।[15][16] इसे दिसम्बर २००४ में अत्यधिक सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और यह ३.७ रेटिंग प्राप्त कर पूरे भारत में पहली बार २९वें स्थान पर रहा।[17] टीएएम के अनुसार इसे सितम्बर २०१० में ५.१७ का उच्चतम रेटिंग मिला, जो इसके पिछले कुछ वर्षों का सबसे अधिक रेटिंग है।[18] २०१५ में इस धारावाहिक को ४.१ के आसपास का रेटिंग मिल रहा था।[19][20]

कलाकार

(बाएँ से दायें) दया शेट्टी, अंशा सयद, जानवी छेड़ा, शिवाजी साटम, विनीत कुमार और आदित्य श्रीवास्तव
(बाएँ से दायें) श्रद्धा मूसले, अंशा सयद, ऋषिकेश पांडे, शिवाजी साटम, नरेंद्र गुप्ता, जानवी छेड़ा और अजय नागरथ
(बाएँ से दायें) दया शेट्टी, अक्षय कुमार, सोनाक्षी सिन्हा और शिवाजी साटम
पूर्व किरदार

विशेष उपस्थिति