भारत में कोरोनावायरस से लॉकडाउन 2020
2019–20 कोरोनावायरस महामारी का एक भाग
तिथी
  • प्रथम चरण: 25 मार्च 2020 (2020-03-25) – 14 अप्रैल 2020 (2020-04-14) (21 दिन)
  • द्वितीय चरण: 15 अप्रैल 2020 (2020-04-15) – 3 मई 2020 (2020-05-03) (19 दिन)
  • तृतीय चरण: 4 मई 2020 (2020-05-04) – 17 मई 2020 (2020-05-17) (14 दिन)
  • चतुर्थ चरण: 18 मई 2020 (2020-05-18) - 31 मई 2020 (2020-05-31) (14 दिन)
  • पाँचवाँ चरण: 1 जून 2020 (2020-06-01) - 30 जून 2020 (2020-06-30) (30 दिन)
जगह भारत
कारण २०२० भारत में कोरोनावायरस महामारी
लक्ष्य भारत में कोरोनावायरस के प्रकोप को रोकना
विधि * लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने से रोकें
  • अस्पतालों, बैंकों, किराने की दुकानों और अन्य आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर सभी गैर-आवश्यक सेवाएं और दुकानें बंद रहेगी
  • वाणिज्यिक और निजी संस्थानों को बंद करना (केवल घर से कार्य किया जा सकता है)
  • सभी शैक्षिक, प्रशिक्षण, अनुसंधान संस्थानों का निलंबन
  • सभी पूजा स्थलों को बंद करना
  • सभी गैर-जरूरी सार्वजनिक और निजी परिवहन का निलंबन
  • सभी सामाजिक, राजनीति, खेल, मनोरंजन, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, धार्मिक गतिविधियों पर निषेध
परिणाम 135.2 करोड़ भारतीय जनसंख्या संगरोध में

२०२० भारत में कोरोनावायरस महामारी को रोकने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को 21 दिनों के लिए पूरे देश को लॉकडाउन रहने का आदेश दिया।[1] इस निर्णय से पहले 22 मार्च को 14 घंटों के जनता कर्फ्यू किया गया था।[2][3]14 अप्रैल सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए लॉकडाउन की अवधि को आगे बढ़ाकर 3 मई करने का फैसला लिया और कहा कि अगले एक हफ्ते नियम और सख्त होंगे।[4] साथ ही मोदी ने कहा कि जहां नए मामले सामने नहीं आएंगे वहाँ कुछ छूट दी जाएगी।[5] 17 मई को गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन को 31 मई तक बढ़ाने की घोषणा की।[6] 30 मई को देशभर में लॉकडाउन के पांचवें चरण की घोषणा की गयी। [7]

पृष्ठभूमि

लॉकडाउन करने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करते हुए।

भारत सरकार ने केरल में 30 जनवरी 2020 को कोरोनावायरस के पहले मामले की पुष्टि की, जब वुहान के एक विश्वविद्यालय में पढ़ रहा छात्र भारत लौटा था।[8] 22 मार्च तक भारत में कोविड-19 के पॉजिटिव मामलों की संख्या 500 तक थी, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मार्च को सभी नागरिकों को 22 मार्च रविवार को सुबह 7 से 9 बजे तक 'जनता कर्फ्यू' करने को कहा था।[9] प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था: "जनता कर्फ्यू कोविड-19 के खिलाफ एक लंबी लड़ाई की शुरुआत है"। दूसरी बार राष्ट्र को संबोधित करते हुए, 24 मार्च को, उन्होंने 21 दिनों की अवधि के लिए, उस दिन की मध्यरात्रि से देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की।[10] उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस के प्रसार को नियंत्रित करने का एकमात्र समाधान सामाजिक दूरी है।[11] उन्होंने यह भी कहा कि लॉकडाउन जनता कर्फ्यू की तुलना में सख्त लागू किया जाएगा।[12]

वहीं अब भारत में लॉकडाउन को कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। इस बार इसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी जी ने नही बल्कि भारतीय ग्रह मंत्रालय ने की है। इस लॉकडाउन को 3.0 नाम दिया गया है[13]

17 मई को भारत मे कोरोना वायरस के मामलों की संख्या भड़ कर 90,927 हो गई है ऐसे मे कोरोनावायरस महामारी को रोकने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा भारत सरकार को सभी राज्यों में 31 मई तक लॉकडाउन भड़ाने के निर्देश दिए गए।

रोक

लॉकडाउन के दौरान लोगों को अपने घरों से बाहर निकलना निषेध किया गया है।[12] सभी परिवहन सेवाओं - सड़क, वायु, और रेल को निलंबित किया गया है हालांकि आग, पुलिस, जरूरी सामान और आपातकालीन सेवाओं का उपयोग किया जा सकेगा।[14] शैक्षिक संस्थानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आतिथ्य सेवाओं को भी निलंबित कर दिया गया।[14] खाद्य दुकानें, बैंक और एटीएम, पेट्रोल पंप, अन्य आवश्यक वस्तुएं और उनके विनिर्माण जैसी सेवाओं को छूट दी गई है।[15] गृह मंत्रालय ने कहा कि जो व्यक्ति लॉकडाउन का पालन नहीं करेंगे उन्हें एक साल तक की जेल भी की जा सकती है।[14]

पीएम मोदी की जनता से अपील

  1. अपने घर के बूढ़े-बुजुर्गों का ख्याल रखें।
  2. गाइडलाइन का सख्ती से पालन करें।
  3. अपनी इम्युनिटी बढ़ाएं इसके लिए आयुष मंत्रालय द्वारा दिये गए दिशा-निर्देशों का पालन करें।
  4. आयुष ऐप जरुर डाउन लोड करें और दूसरों को भी करवाए।
  5. जितना हो सके उतना गरीब परिवार की मदद करें उनके लिए भोजन की व्यवस्था करें।
  6. आप अपने व्यवसाय, अपने उद्योग में अपने साथ काम करने वाले लोगों के प्रति संवेदना दिखाए, किसी को भी नौकरी से न निकालें
  7. देश के कोरोना योद्धाओं, हमारे डॉक्टर- नर्सेस, सफाई कर्मी, पुलिसकर्मी इन सभी का पूरा सम्मान करें।

    लॉकडाउन के पहले दिन, लगभग सभी सेवाओं और कारखानों को निलंबित कर दिया गया था।[17] काफी जगह लोग आवश्यक सामान स्टॉक करते देखे गए।[18] साथ ही जिन लॉकडाउन के दौरान लोगों को मानदंडों का उल्लंघन करते पाये जाने पर गिरफ्तार किया गया, जैसे कि बिना किसी आपात स्थिति के बाहर निकलने, व्यवसाय खोलने और घरेलू संगरोध का उल्लंघन।[19] सरकार ने ई-कॉमर्स वेबसाइटों और विक्रेताओं के साथ बैठकें की, ताकि लॉकडाउन अवधि के दौरान पूरे देश में आवश्यक सामानों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।[19] कई राज्यों ने गरीब और प्रभावित लोगों के लिए राहत राशि की घोषणा की[19], जबकि केंद्र सरकार प्रोत्साहन पैकेज को अंतिम रूप दिया।[20]

    26 मार्च को, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉकडाउन से प्रभावित लोगों की मदद के लिए 1,70,000 करोड़ (US$24.82 बिलियन) प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की।[21] इस पैकेज का उद्देश्य गरीब परिवारों को तीन महीने के लिए सीधे नकद हस्तांतरण, मुफ्त अनाज और रसोई गैस के माध्यम से खाद्य सुरक्षा उपाय प्रदान करना।[22] इसमें चिकित्सा कर्मियों के लिए बीमा कवर भी प्रदान किया।[21]

    27 मार्च को, भारतीय रिजर्व बैंक ने लॉकडाउन के आर्थिक प्रभावों को कम करने में मदद करने के लिए कई उपायों की घोषणा की।[23]

    प्रभाव

    जैसे ही लॉकडाउन की घोषणा की गई, देश भर में लोगों में उनकी आवश्यक सामान की पूर्ति के लिए घबराहट देखी गयी।[24][10][25] अमेज़न इंडिया और फ्लिपकार्ट ने लॉकडाउन के बाद अपनी सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया।[26] केंद्र सरकार की मंजूरी के बावजूद कई राज्य सरकारों द्वारा खाद्य वितरण सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया।[27] लॉकडाउन के बाद बेरोजगार होने के कारण हजारों लोग प्रमुख भारतीय शहरों से बाहर चले गए।[28] लॉकडाउन के बाद, भारत की बिजली की मांग 28 मार्च को घटकर पांच महीने के निचले स्तर पर आ गई।[29]

    प्रभावशीलता

    लॉकडाउन के दौरान सब्जी मंडियों में लोगों की भीड़ देखी जा रही है और लोग सामाजिक दूरी (social distancing) नहीं रख रहे है।[30][31][32] 29 मार्च को मन की बात रेडियो कार्यक्रम में मोदी ने इसके खिलाफ सलाह दी और घर से बिना वजह बाहर न निकलने को कहा।[33]

    प्रतिक्रियाएं

    भारत के विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रतिनिधि हेंक बेकेडम ने इसे "समय पर, व्यापक और मजबूत" बताते हुए प्रशंसा की है।[2] डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी निदेशक, माइक रयान ने कहा कि सिर्फ लॉकडाउन कोरोनोवायरस को खत्म नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि भारत को संक्रमण की दूसरी और तीसरी लहर को रोकने के लिए आवश्यक उपाय करने चाहिए।[34]

    इन्हें भी देखें