नीलकंठ
इंडियन रोलर
Indian Roller Bandhavgarh.jpg
बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, भारत में नीलकंठ पक्षी
LC (IUCN3.1[1])
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: जंतु
संघ: रज्जुकी (Chordata)
वर्ग: पक्षी (Aves)
गण: कोरैसीफ़ोर्मीस (Coraciiformes)
कुल: कोरैसीडाए (Coraciidae)
वंश: कोरेशियस
जाति: C. benghalensis
द्विपद नाम
Coracias benghalensis
(लीनियस, १७५८)

नीलकंठ (अंग्रेजी:Indian roller, वैज्ञानिक नाम : कोरेशियस बेन्गालेन्सिस) रोलर वर्ग का पक्षी है। यह मुख्यतः उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में पाया जाता है जिसमें पश्चिमी एशिया से भारतीय उपमहाद्वीप तक शामिल हैं। इसे आईयूसीएन लाल सूची में अल्पतम चिन्ता की स्थिति में सूचीबद्ध किया गया है।[1]

यह पक्षी मुख्य रूप से प्रजनन के मौसम में नर की हवाई कलाबाजी के लिए जाना जाता है। यह अक्सर सड़क के किनारे पेड़ों और तारों में बैठे हुए देखे जाते है और आमतौर पर खुले घास के मैदान और झाड़ियों के जंगलों में देखे जाते है। इन पक्षियों की सबसे बड़ी आबादी भारत में पायी जाती है और भारत के कई राज्यों ने इसे राज्य पक्षी के रूप में चुना है।

विवरण

नीलकंठ 26-27 सेंटीमीटर लम्बा एक गठीला पक्षी है और इसी के प्रवासी यूरोपीय रोलर पक्षी से अपनी बनावट में यह समान दिखाई देता है। यूरोपियन रोलर का अग्रणी भाग नीला होता है, उसके विपरीत भारतीय रोलर (नीलकंठ) भूरा होता है। इसके सिर का उपरी हिस्सा (ताज) और पिछला हिसा (वेंट) नीला होता हैं। पंख सुरमई रंग की एक पट्टी के साथ गहरे बैंगनी-नीले रंग के होते हैं। पूंछ का रंग प्रशियाई नीला होता है जिसमें आकाशीय नीले रंग की पट्टी होती है और इसका मध्य भाग हल्का हरा होता है। गर्दन और गले सफेद धारियों के साथ बैगनी रंग के हैं। आँख के चारों ओर गेरुआ रंग के धब्बे होते हैं। पैरों की तीन आगे की उंगलियां तले में एकीकृत होती हैं। नीलकंठ के चोंच का उपरी भाग घुमावदार होता है जिसका अग्रभाग हुकनुमा होता है तथा पूरी चोंच लम्बी एवं संकुचित होती है। इसके नथुने लंबे और अनावृत होते हैं तथा चोंच के आधार पर लंबे, खड़े एवं कड़े बाल होते हैं।[2][3][4]

आमतौर पर इसकी तीन उप-प्रजातियां अभिज्ञात हैं। इसकी नामांकित प्रजाति पश्चिमी एशिया (इराक, अरब) से पूर्व में भारतीय उपमहाद्वीप में और भारत के भीतर उत्तर में विंध्य पर्वत श्रृंखला में पाया जाता है। उप-प्रजाति इंडिकस प्रायद्वीपीय भारत और श्रीलंका में पाया जाता है। दक्षिण में पाये जाने वाले प्रजाती में गर्दन गहरा लाल रंग का होता है जो नामांकित प्रजाती में अनुपस्थित है।

वितरण और आवास

नीलकंठ एशिया में, इराक और संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण-पश्चिमी एशिया में भारतीय उपमहाद्वीप तक फैले हुए है, जिसमें श्रीलंका, लक्षद्वीप और मालदीव द्वीप शामिल हैं।[4] इसके मुख्य आवास में कृषि क्षेत्र, कम घने जंगल और घास के मैदान शामिल हैं।[2]

पारिस्थितिकी और व्यवहार

नीलकंठ को अक्सर प्रमुख पेड़ों या तारों पर देखा जाता है। वे अपने शिकार को पकड़ने के लिए जमीन पर उतरते हैं जिसमें कीड़े, मकड़ी, बिच्छू, छोटे सांप और उभयचर शामिल हो सकते हैं।[5][6][7] आग उन्हें आकर्षित करती है।[2] दक्षिणी भारत में कृषि आवासों में, वे लगभग 50 पक्षी प्रति वर्ग किमी के घनत्व पर पाए गए हैं। वे मुख्य रूप से 3-10 मीटर ऊंचे बसेरो पर बैठते हैं और ज्यादातर जमीन के कीड़ों को खाते हैं। उनके शिकार का लगभग 50% भृंग और 25% टिड्डे और झींगुर होते हैं।[8][9][10]

भारतीय संस्कृति में

नीलकंठ भारत के आबादी वाले मैदानों और हिंदू किंवदंतियों से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि विष्णु के लिए इसकी पूजा की जाती है, और दशहरा या दुर्गा पूजा के अंतिम दिन जैसे त्योहारों के दौरान इसको पकड़ा एवं छोड़ा जाता है।[11] इसका नाम नीलकंठ का अर्थ "नीला गला" होता है,[12] जोकि हिन्दू देवता शिव से जुड़ा एक नाम (जिनका जहर पीने के कारण गला नील हो गया था) है।[13][14] ऐसा माना जाता था कि इसके पंख काटकर घास में मिलाकर गायों को खिलाने से उनकी दूध की पैदावार में वृद्धि होती है।[15] नीलकंठ को ओडिशा, कर्नाटक और तेलंगाना के भारतीय राज्यों द्वारा राज्य पक्षी के रूप में चुना गया है।[16][17]

चित्र दीर्घा

सन्दर्भ

  1. बर्डलाइफ़ इंटरनेशनल (2016). "Coracias benghalensis". संकटग्रस्त जातियों की IUCN लाल सूची (अंग्रेज़ी में). आईयूसीएन. 2016: e.T22725914A94905872. डीओआइ:10.2305/IUCN.UK.2016-3.RLTS.T22725914A94905872.en. अभिगमन तिथि 26 नवम्बर 2019.
  2. रासमुसैन पीसी; जे॰सी॰ एंडर्टन (2005). Birds of South Asia: The Ripley Guide [दक्षिण एशिया के पक्षी: द रिप्ली गाइड] (अंग्रेज़ी में). 2. स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन और लिंक्स एडिशन. पृ॰ 270.
  3. ह्यूग व्हिस्लर (1949). Popular handbook of Indian birds [भारतीय पक्षियों की प्रचलित पुस्तिका] (अंग्रेज़ी में) (4th संस्करण). गरनी और जैक्सन, लंदन. पपृ॰ 293–295.
  4. एस॰ अली; एस॰डी॰ रिप्ली (1983). Handbook of the birds of India and Pakistan [भारत और पाकिस्तान के पक्षियों की पुस्तिका] (अंग्रेज़ी में). 4 (दूसरा संस्करण). ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस. पपृ॰ 116–120.
  5. यू॰एस॰ शर्गा (1936). "Indian Roller or Blue Jay (Coracias benghalensis Linn.) feeding on a scorpion" [इंडियन रोलर या ब्लू जे (कोरासिया बेंगालेंसिस लिन।) द्वारा बिच्छू का भोजन]. जर्नल ऑफ़ द बॉम्बे नैचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (अंग्रेज़ी में). 39 (1): 179.
  6. जी॰एच॰ इवान्स (1921). "The food of the Burmese Roller (C. affinis) and of the Ashy Drongo (D. nigrescens)". जर्नल ऑफ़ बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (अंग्रेज़ी में). 27 (4): 955–956.
  7. सी.एच. बिडुलफ (1937). "The Southern Indian Roller or Blue Jay Coracias benghalensis indica (Linn.) killing a small snake". जर्नल ऑफ़ बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (अंग्रेज़ी में). 39 (4): 865.
  8. एन. शिवकुमारन; के. थियागेसन (2003). "Population, diurnal activity patterns and feeding ecology of the Indian Roller Coracias benghalensis (Linnaeus, 1758)" [इंडियन रोलर (नीलकंठ) कोरासियास बेंगालेंसिस की जनसंख्या, भोजन संबंधी गतिविधि पैटर्न और भोजन पारिस्थितिकी (लिनिअस, 1758)] (PDF). चिड़ियाघरों का प्रिंट जर्नल (अंग्रेज़ी में). 18 (5): 1091−1095. डीओआइ:10.11609/jott.zpj.18.5.1091-5.
  9. डी. एन. मैथ्यू; टी. सी. नरेन्द्रन; वी.जे. जैकरियास (1978). "A comparative study of the feeding habits of certain species of Indian birds affecting agriculture" [कृषि को प्रभावित करने वाले भारतीय पक्षियों की कुछ प्रजातियों के भोजन की आदतों का तुलनात्मक अध्ययन]. जर्नल ऑफ़ बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (अंग्रेज़ी में). 75 (4): 1178–1197.
  10. पी. के. जे. बर्टन (1984). "Anatomy and evolution of the feeding apparatus in the avian orders Coraciiformes and Piciformes" [एवियन ऑर्डर कोरासिफोर्म और पिकिफोर्मेस में आहार तंत्र की एनाटॉमी और विकास]. बुलेटिन ऑफ़ द ब्रिटिश म्यूज़ियम (प्राकृतिक इतिहास), जूलॉजी सीरीज़ (अंग्रेज़ी में). 47 (6): 331–443.
  11. जे. एल. किपलिंग (1904). भारत में जानवर और आदमी (अंग्रेज़ी में). लंदन: मैकमिलन एंड कंपनी. पृ॰ 33.
  12. डब्ल्यू. टी. ब्लैनफोर्ड (1889). The Fauna of British India, Including Ceylon and Burma. Birds Volume 3 [सीलोन और बर्मा समैत ब्रिटिश भारत का वन्यजीवन, बर्ड्स, संस्करण ३] (अंग्रेज़ी में). टेलर एंड फ्रांसिस, लंदन. पपृ॰ 103–105.
  13. मित्रा, शरतचंद्र (1898). "Bengali and Bihari Folklore about Birds. Part I." [पक्षियों के बारे में बंगाली और बिहारी लोकगीत। भाग एक।]. बंगाल की एशियाई सोसाइटी का जर्नल (अंग्रेज़ी में). 67 (2): 67–74.
  14. अज्ञात (1998). "Vernacular Names of the Birds of the Indian Subcontinent" [भारतीय उपमहाद्वीप के पक्षियों के स्थानीय नाम]. ब्यूसरोस (अंग्रेज़ी में). 3 (1): 53–109.
  15. ई. थर्स्टन (1912). Omens and superstitions of southern India [दक्षिण भारत के अंधविश्वास और शगुन चिन्ह] (अंग्रेज़ी में). न्यूयॉर्क: मैकब्राइड, नैस्ट एंड कंपनी. पृ॰ 88.
  16. "राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतीक". knowindia.gov.in (अंग्रेज़ी में). राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), DeitY, MoCIT, भारत सरकार. मूल से 12 नवम्बर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 जून 2016.
  17. "राज्य चिन्ह". तेलंगाना राज्य पोर्टल (अंग्रेज़ी में). तेलंगाना सरकार. अभिगमन तिथि 26 जून 2016.

बाहरी कड़ियाँ