नाग प्रक्षेपास्त्र (संस्कृत: नाग) एक तीसरी पीढ़ी का भारत द्वारा स्वदेशीय निर्मित, टैंक भेदी प्रक्षेपास्त्र है। यह उन पाँच (प्रक्षेपास्त्र) मिसाइल प्रणालियों में से एक है जो भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत विकसित की गई है। इस प्रक्षेपास्त्र का विकास 300 करोड़ (US$43.8 मिलियन) की लागत से किया गया है। इसकी मारक क्षमता 4 कि०मी० है।

इसका प्रथम सफल परीक्षण नवम्बर 1990 में किया गया। इसे 'दागो और भूल जाओ' टैंक रोधी प्रक्षेपास्त्र भी कहा जाता है क्योंकि एक बार इसे दागे जाने के बाद पुनः निर्देशित कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

18 जुलाई 2019 को डीआरडीओ ने नाग एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का पोखरण में फायरिंग रेंज राजस्थान में सफल परीक्षण किया।

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