काशीपुर
—  नगर  —
View of काशीपुर, भारत
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तराखण्ड
जनसंख्या
घनत्व
१,२१,६२३ (२०११ के अनुसार )
२२,२७५.२ प्रति वर्ग मीटर
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
५.४ वर्ग किमी कि.मी²
२१८ मीटर

निर्देशांक: 29°13′N 78°57′E / 29.22°N 78.95°E / 29.22; 78.95

काशीपुर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के उधम सिंह नगर जनपद में स्थित एक महत्वपूर्ण पौराणिक एवं औद्योगिक शहर है। वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार इस नगर की कुल जनसंख्या १,२१,६२३ है, जबकि काशीपुर तहसील की कुल जनसंख्या २,८३,१३६ है। इस प्रकार, जनसंख्या की दृष्टि से काशीपुर कुमाऊँ में तीसरा और उत्तराखण्ड में छठा सबसे बड़ा नगर है। उधम सिंह नगर जनपद के पश्चिमी भाग में स्थित यह नगर भारत की राजधानी, नई दिल्ली से लगभग २४० किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में, और उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी, देहरादून से लगभग २०० किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

काशीपुर को पुराने समय में गोविषाण या उज्जयनी नगरी भी कहा जाता था, और हर्ष के शासनकाल (७ वीं शताब्दी) से पहले यह नगर कुणिंद, कुषाण, यादव, और गुप्त समेत कई राजवंशों के अधीन रहा। इस जगह का नाम काशीपुर, चन्दवंशीय राजा देवी चन्द के एक पदाधिकारी काशीनाथ अधिकारी के नाम पर पड़ा, जिन्होंने इसे १६-१७ वीं शताब्दी में दोबारा नए सिरे से बसाया था। १८ वीं शताब्दी तक यह नगर कुमाऊँ राज्य में रहा, और फिर यह नन्द राम द्वारा स्थापित काशीपुर राज्य की राजधानी बन गया। १८०१ में यह नगर ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आया, जिसके बाद १८१४ के आंग्ल-गोरखा युद्ध में कुमाऊँ पर अंग्रेजों द्वारा अधिकार स्थापित करने में इस नगर द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभायी गयी थी। १९ वीं शताब्दी के मध्य में काशीपुर को कुमाऊँ मण्डल के तराई जिले का मुख्यालय बना दिया गया।

ऐतिहासिक रूप से, इस क्षेत्र की अर्थव्यस्था कृषि तथा बहुत छोटे पैमाने पर लघु औद्योगिक गतिविधियों पर आधारित रही है। काशीपुर को कपड़े और धातु के बर्तनों का ऐतिहासिक व्यापार केन्द्र भी माना जाता है। भारत की स्वतंत्रता से पूर्व काशीपुर नगर में जापान से मखमल, चीन से रेशम व इंग्लैंड के मैनचेस्टर से सूती कपड़े आते थे, जिनका तिब्बत व पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापार होता था। बाद में प्रशासनिक प्रोत्साहन और समर्थन के साथ काशीपुर शहर के आसपास तेजी से औद्योगिक विकास हुआ। वर्तमान में नगर के एस्कॉर्ट्स फार्म क्षेत्र में छोटी और मझोली औद्योगिक इकाइयों के लिए एक एकीकृत औद्योगिक स्थल (इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल एस्टेट) निर्माणाधीन है।

भौगोलिक रूप से काशीपुर कुमाऊँ के तराई क्षेत्र में स्थित है, जो पश्चिम में जसपुर तक तथा पूर्व में खटीमा तक फैला है। कोशी और रामगंगा नदियों के अपवाह क्षेत्र में स्थित काशीपुर ढेला नदी के तट पर बसा हुआ है। १८७२ में काशीपुर नगरपालिका की स्थापना हुई, और २०११ में इसे उच्चीकृत कर नगर निगम का दर्जा दिया गया। यह नगर अपने वार्षिक चैती मेले के लिए प्रसिद्ध है। महिषासुर मर्दिनी देवी, मोटेश्वर महादेव तथा माँ बालासुन्दरी के मन्दिर, उज्जैन किला, द्रोण सागर, गिरिताल, तुमरिया बाँध तथा गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब काशीपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं।

नामकरण तथा स्थापना

वैदिक काल में काशीपुर नगर का नाम उज्जैनी (उज्जयनी / उज्जयनी नगरी) तथा यहां से बहने वाली ढेला नदी का नाम स्वर्णभद्रा था।[1] हर्ष काल में इसे गोविषाण कहा जाने लगा। गोविषाण शब्द दो शब्दों "गो" (गाय) और "विषाण" (सींग) से बना है, और इसका अर्थ "गाय का सींग" है। प्राचीन समय में गोविषाण को तत्कालीन समय की राजधानी व समृद्ध नगर कहा गया है।[2] वर्तमान काशीपुर नगर की स्थापना काशीनाथ अधिकारी ने की थी, जो चम्पावत के राजा देवी चन्द के अंतर्गत तराई क्षेत्र के लाट (अधिकारी) थे। उनके नाम पर ही इसे काशीपुर कहा जाने लगा।[3][4]

काशीपुर की स्थापना की सही तिथि विवादित है, और कई इतिहासकारों ने इस बिन्दु पर भिन्न-भिन्न विचार व्यक्त किए हैं। बिशप हीबर ने सर्वप्रथम अपनी पुस्तक, ट्रेवल्स इन इंडिया में लिखा कि काशीपुर की स्थापना ५००० साल पहले (लगभग ३१७६ ईसा पूर्व में) काशी नामक देवता ने की थी।[5] सर अलेक्जेंडर कनिंघम ने अपनी पुस्तक, द अन्सिएंट जियोग्राफी ऑफ़ इंडिया में हीबर के विचारों को सिरे से नकारते हुए लिखा "बिशप को अपने मुखबिर से धोखेबाज़ी मिली, क्योंकि यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि यह नगर आधुनिक है। इसे चम्पावत के राजा देवी-चन्द्र के अनुयायी काशीनाथ द्वारा १७१८ ई में बनाया गया है"।[6] बद्री दत्त पाण्डेय ने अपनी पुस्तक "कुमाऊँ का इतिहास" में कनिंघम के विचारों का विरोध करते हुए दावा किया है कि नगर १६३९ में ही स्थापित हो चुका था।[7]

इतिहास

नगर में प्राप्त सिक्कों और अन्य अवशेषों से पता चलता है कि यह क्षेत्र दूसरी शताब्दी के आसपास कुणिंद राजवंश के अधीन था।[8] कान्ति प्रसाद नौटियाल ने अपनी पुस्तक, "आर्केलॉजी ऑफ़ कुमाऊँ" में गोविषाण का उल्लेख करते हुए लिखा है कि "कुमाऊँ क्षेत्र में ढिकुली, जोशीमठ तथा बाड़ाहाट के साथ-साथ गोविषाण भी कुणिंद राज्य के प्रमुख नगरों में से एक रहा होगा।"[9] कुछ वर्ष पश्चात गुप्त राजवंश का शासन स्थापित होने से पहले इस क्षेत्र पर कुषाणों,[9] और यादवों (यौद्धेय) द्वारा आक्रमण का भी उल्लेख है।[10] गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद राजा हर्ष (६०६-६४१ ईसवी) ने गोविषाण को अपना सामन्ती राज्य बना लिया।[11] उस समय के कई खंडहर अभी भी शहर के पास विद्यमान हैं। माना जाता है कि काशीपुर कपड़े और धातु के बर्तनों का ऐतिहासिक व्यापार केन्द्र था।[12]

प्राचीन नगर गोविषाण के अवशेष

हर्ष काल में चीनी यात्री ह्वेनसांग भी यहाँ आया था।[13] ह्वेनसांग के अनुसार "मादीपुर से ६६ मील की दूरी पर गोविषाण नामक स्थान था जिसकी ऊँची भूमि पर ढाई मील का एक गोलाकार स्थान था। यहां उद्यान, सरोवर एवं मछली कुंड थे। इनके बीच ही दो मठ थे, जिनमें सौ बौद्ध धर्मानुयायी रहते थे। यहाँ ३० से अधिक हिन्दू धर्म के मंदिर थे। नगर के बाहर एक बड़े मठ में २०० फुट ऊँचा अशोक का स्तूप था। इसके अलावा दो छोटे-छोटे स्तूप थे, जिनमें भगवान बुद्ध के नख एवं बाल रखे गए थे। इन मठों में भगवान बुद्ध ने लोगों को धर्म उपदेश दिए थे।"[14] १८६८ में भारत के तत्कालीन पुरातत्व सर्वेक्षक सर अलेक्जेंडर कनिंघम ने इन वस्तुओं की खोज हेतु इस स्थान का दौरा किया किन्तु इन मठों में उन्हें ये वस्तुएँ, खासकर भगवान बुद्ध के नख एवं बाल नहीं मिले। अपनी रिपोर्ट में कनिंघम ने गोविषाण को किसी प्राचीन राज्य की राजधानी बताया, जिसकी सीमाओं का विस्तार वर्तमान उधमसिंहनगर, रामपुर तथा पीलीभीत जनपदों तक था।[15]

काशीपुर में खुदाई में मिली विष्णु त्रिविक्रम की मूर्ती

आठवीं शताब्दी आते आते यह नगर कत्यूरी राजवंश के अधीन आ गया, जिनकी राजधानी कार्तिकेयपुरा में थी।[16] ग्यारहवीं शताब्दी में कत्यूरी राजवंश के विघटन के बाद यह क्षेत्र पहले स्थानीय सरदारों के और फिर दिल्ली सल्तनत के शासनाधीन आ गया। तेरहवीं शताब्दी में कुमाऊँ के शासक गरुड़ ज्ञान चन्द (१३७४-१४१९) ने दिल्ली के सुल्तान से भाभर तथा तराई क्षेत्रों को उपहार स्वरूप पाकर उन पर अधिकार स्थापित किया।[17] रुद्र चन्द (१५६८-१५९७) के शासनकाल में काठ तथा गोला के नवाब ने तराई क्षेत्रों पर अधिकार करने का प्रयास किया, परन्तु रुद्र चन्द ने उनके आक्रमण को निष्फल कर दिया।[18] इसके बाद तराई क्षेत्रों को परगना का दर्जा देकर यहां एक अधिकारी की नियुक्ति की गई, और उसके निवास के लिए रुद्र चन्द ने रुद्रपुर नगर की स्थापना करी।[19] रुद्र चन्द के बाद बाज बहादुर चन्द (१६३८-१६७८) ने रुद्रपुर के पश्चिम में बाजपुर नगर की स्थापना कर तराई के मुख्यालय वहां स्थानांतरित करने का एक विफल प्रयास किया। देवी चन्द (१७२०-१७२६) के शासनकाल में तराई के लाट काशीनाथ अधिकारी ने अपने निवास के लिए काशीपुर में महल का निर्माण करवाया, तथा तराई का मुख्यालय रुद्रपुर से यहां स्थानांतरित कर दिया।[20]

काशीपुर में अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध तक चन्द राजवंश का शासन रहा। १७७७ में काशीपुर के अधिकारी, नन्द राम ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया और काशीपुर राज्य की स्थापना की।[21] इसके २४ वर्ष बाद १८०१ में काशीपुर के तत्कालीन शासक, शिव लाल ने यह राज्य अंग्रेजों को सौंप दिया था, जिसके बाद काशीपुर ब्रिटिश भारत में एक राजस्व मण्डल बन गया।[22] इसी समय में काशीपुर राज्य के राजकवि गुमानी पन्त ने इस नगर की विशेषताओं पर एक कविता भी लिखी थी, जिसमें उन्होंने नगर में बहती ढेला नदी, और मोटेश्वर महादेव मन्दिर का वर्णन किया है।[23] १८१४ में आंग्ल गोरखा युद्ध छिड़ने पर ब्रिटिश सेना ने काशीपुर में पड़ाव डाला था, और कुमाऊँ क्षेत्र के अपने सभी अभियानों के लिए इस नगर का प्रयोग आधार पड़ाव के रूप में किया था। १० जुलाई १८३७ को काशीपुर को मुरादाबाद जनपद में शामिल किया गया और फिर १९४४ में बाजपुर, काशीपुर तथा जसपुर नगरों को काशीपुर नामक एक परगना में पुनर्गठित किया गया।[24] काशीपुर को बाद में संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध के तराई जनपद का मुख्यालय बनाया गया।[24]

१८१४ आंग्ल-गोरखा युद्ध के समय काशीपुर में पड़ाव डाले सैनिक।

१८९१ में नैनीताल तहसील को कुमाऊँ जनपद से स्थानांतरित कर तराई के साथ मिला दिया गया, और फिर इसके मुख्यालय को काशीपुर से नैनीताल में लाया गया था। १८९१ में ही कुमाऊँ और तराई जनपदों का नाम उनके मुख्यालयों के नाम पर क्रमशः अल्मोड़ा तथा नैनीताल रख दिया गया, और काशीपुर नैनीताल जनपद में एक तहसील तथा परगना भर रह गया। २० वीं सदी के प्रारम्भ में काशीपुर नगर रेल नेटवर्क से भी जुड़ गया था।[25] रेल निर्माण के बाद नगर के विकास में तेजी आयी, और काशीपुर तथा रामनगर कुमाऊँ के प्रमुख व्यापारिक केंद्र बनकर उभरे।[26] १९४७ में भारत की स्वतंत्रता के बाद काशीपुर और नैनीताल जनपद के अन्य भाग संयुक्त प्रांत का हिस्सा बनें रहे, जिसका नाम बाद में उत्तर प्रदेश राज्य हो गया था।

३० सितंबर १९९५ को नैनीताल जनपद के तराई क्षेत्र की चार तहसीलों (किच्छा, काशीपुर, सितारगंज तथा खटीमा) को मिलाकर उधम सिंह नगर जनपद का गठन किया गया, और इसका मुख्यालय रुद्रपुर को बनाया गया।[27] ९ नवंबर २००० को भारत की संसद द्वारा उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, २०००[28] को पारित किया गया, जिसके बाद काशीपुर नवनिर्मित उत्तराखण्ड राज्य का भाग बन गया, जो भारत गणराज्य का २७वां राज्य था।[29] उत्तराखण्ड राज्य के गठन के बाद दीक्षित आयोग की एक रिपोर्ट में नगर को भूगोल तथा जलवायु, जल उपलब्धता, भूमि की उपलब्धता, प्राकृतिक जल निकासी और निवेश इत्यादि मापदंडों के आधार पर राज्य की राजधानी के लिए दूसरा सबसे उपयुक्त स्थान पाया था।[30][31] २७ जनवरी २०१३ को उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री, विजय बहुगुणा ने रुड़की और रुद्रपुर के साथ-साथ काशीपुर को भी नगर निगम बनाने की घोषणा की,[32] और २८ फरवरी २०१३ को आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद काशीपुर नगर पालिका का उच्चीकरण करके इसे नगर निगम का दर्जा दिया गया।[33][34]

भूगोल

नई दिल्ली के २४० किमी उत्तर-पूर्व में स्थित काशीपुर उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र के दक्षिण पश्चिमी भाग में रामगंगा तथा कोसी(स्थानीय कोशी या कौशिकी नदी) नदियों के अपवाह क्षेत्र के मध्य तराई में स्थित है। नगर के उत्तर में रामनगर का भाभर क्षेत्र पड़ता है, जो इसे शिवालिक पहाड़ियों से अलग करता है, तथा दक्षिण में रुहेलखंड के गांगेय मैदान हैं, जहां दूर तक ऊंची घास के मैदान फैले हैं।[35] ढेला नदी, जो रामगंगा की सहायक नदी है, काशीपुर से होकर बहती है।[36][37] काशीपुर नगर इसी नाम की एक तहसील का मुख्यालय भी है, जिसके पूर्व में बाजपुर तहसील, पश्चिम में जसपुर तहसील, उत्तर में नैनीताल जनपद की रामनगर तहसील, तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश राज्य का मुरादाबाद जिला है।[38]

काशीपुर नगर के ऊपर बादलों का एक दृश्य

काशीपुर नगर का क्षेत्रफल ८.५४६ वर्ग किलोमीटर है।[39] ५ मार्च १८७२ को जब नगर पालिका परिषद काशीपुर की स्थापना हुई थी, तब इसका क्षेत्रफल १.५० वर्ग किलोमीटर था।[40] १९६६ में नगरपालिका की सीमा में विस्तार होने के उपरान्त नगर का क्षेत्रफल २.२५ वर्ग किमी हो गया था, और इसके बाद १३ मार्च १९७६ को नगरपालिका काशीपुर सीमा का विस्तार कर इसका क्षेत्रफल ५.४५६ वर्ग किमी निर्धारित किया गया।[40] ब्रिटिश काल से पहले तराई क्षेत्रों को मानव निवास के लिए अनुपयुक्त माना जाता था क्योंकि निरंतर बरसात यहां कई छिद्रों, तालाबों और दलदलों में जल भर देती थी, जो मच्छरों के लिए उपयुक्त प्रजनन स्थल बनते हुए मलेरिया का कारण बनते थे।[41]

भौगोलिक रूप से काशीपुर कुमाऊँ के तराई क्षेत्र में स्थित है, जो पश्चिम में जसपुर तक तथा पूर्व में रुद्रपुर, किच्छा होते हुए खटीमा तक फैला है।[42] तराई क्षेत्रों की मिट्टियों में चिकनी मिट्टी, छोटे से लेकर मध्यम कणों वाली रेतीली मिट्टी, और कभी-कभार बजरी भी शामिल होती है।[42] हालांकि स्वरूप में रेत पर चिकनी मिट्टी की प्रभुत्व रहता है। ये मिट्टियाँ यहां बहती नदियां अपने साथ भूमि के अंदर से निकालकर लाती हैं, और इस कारण इस क्षेत्र की मिटटी दलदली तथा उपजाऊ है।[42] भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार, यह शहर भूकम्पीय क्षेत्र ४ के अन्तर्गत आता है।[43][44]

काशीपुर की जलवायु नगर के दक्षिण में स्थित गांगेय मैदानों की तरह ही आर्द्र अर्ध-कटिबन्धीय है; गर्मियों (जून) में औसत दैनिक तापमान ३१.६ डिग्री सेल्सियस (८८.९ डिग्री फारेनहाइट) के आसपास होता है, जबकि सर्दियों (जनवरी) में यह लगभग १४.५ डिग्री सेल्सियस (५८.१ डिग्री फारेनहाइट) तक गिर जाता है।[45] वर्ष भर में औसत तापमान १७.१ डिग्री सेल्सियस तक की भिन्नता प्रदर्शित करता है। सबसे शुष्क और सबसे नम महीनों के बीच वर्षा का अंतर ३६९ मिमी रहता है। ५ मिमी औसत वर्षा के साथ नवम्बर सबसे शुष्क माह है, जबकि ३७४ मिमी के औसत के साथ जुलाई में सबसे अधिक वर्षा होती है। नगर में मुख्य रूप से तीन ऋतुएं होती हैं; मार्च से जून तक ग्रीष्म ऋतु, जुलाई से नवम्बर तक मानसून; और दिसंबर से फरवरी तक शीत ऋतु[44] कोपेन जलवायु वर्गीकरण के अनुसार इसका कोड "cwa" है।[46]