कछवाहा भारत में कुशवाहा जाति की उपजाति है। परंपरागत रूप से वे कृषि करने वाले किसान थे लेकिन 20 वीं शताब्दी में वे राजपूत गोत्र होने का दावा करने लगे। जाति के भीतर कुछ परिवारों ने कई राज्यों और रियासतों पर शासन किया है जैसे अलवर, अंबर (जिसे बाद में जयपुर कहा जाने लगा) और मैहर

कछवाहा को कभी-कभी कुशवाहा भी कहा जाता है। इस शब्द का उपयोग समान व्यावसायिक पृष्ठभूमि वाले कम से कम चार समुदायों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाता है, जिनमें से सभी कुश के माध्यम से पौराणिक सूर्यवंश के वंश से होने का दावा करते हैं। कुश राम और सीता के जुड़वां बेटों में से एक थे। पहले यह लोग शिव और शक्ति की पूजा करते थे।[1]

मूल

आधुनिक काल के कुशवाहा समुदाय जिनमें से कछवाहा एक हैं, आम तौर पर विष्णु के अवतार राम के पुत्र कुश के वंशज होने का दावा करते हैं। यह सूर्यवंश राजवंश के होने के उनके दावे को दिखाने के लिए है लेकिन यह बीसवीं शताब्दी में विकसित उत्पत्ति का मिथक है। उस समय से पहले, कुशवाहा समुदाय की विभिन्न शाखाएँ - कछवाहा, काछी, कोइरी और मुराओ - शिव और शक्ति के साथ संबंध बताती थीं।

शासक

एक कछवाहा परिवार ने अंबर पर शासन किया जिसे बाद में जयपुर राज्य के रूप में जाना जाने लगा और इस शाखा को कभी-कभी राजपूत कहा जाता है। उन्होंने 1561 में मुगल सम्राट अकबर से समर्थन मांगा था। तत्कालीन प्रमुख भारमल कछवा को औपचारिक रूप से एक राजा के रूप में मान्यता दी गई थी और मुगल सम्राट अकबर द्वारा मुगल कुलीनता में में शामिल किया गया था। नए गठबंधन को ठोस बनाने के लिए कछवाहा शासक ने अपनी बेटी का विवाह भी अकबर से कर दिया। एक राज्यपाल को भारामेल के क्षेत्र की देखरेख के लिए नियुक्त किया गया था और इस क्षेत्र के राजस्व के एक हिस्से से उनको भुगतान किया जाता था।[2][3]

संदर्भ

  1. Pinch, William R. (1996). Peasants and monks in British India. University of California Press. पपृ॰ 12, 91–92. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-520-20061-6. अभिगमन तिथि 22 February 2012.
  2. Wadley, Susan Snow (2004). Raja Nal and the Goddess: The North Indian Epic Dhola in Performance. Indiana University Press. पपृ॰ 110–111. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780253217240.
  3. Sadasivan, Balaji (2011). The Dancing Girl: A History of Early India. Institute of Southeast Asian Studies. पपृ॰ 233–234. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9789814311670.